मुंडेरवा में ‘विकास’ का काला सच: नींव में मिट्टी, सरकारी धन की खुली लूट!
बस्ती का मुंडेरवा बना भ्रष्टाचार का गढ़: घटिया निर्माण पर मौन क्यों है प्रशासन? विकास के नाम पर गद्दारी: मुंडेरवा में मिट्टी पर खड़ी हो रही 'भ्रष्टाचार की दीवारें'
अजीत मिश्रा (खोजी)
मुंडेरवा का ‘विकास’ बना भ्रष्टाचार का अखाड़ा: नींव में मिट्टी और जेबों में कमीशन का नंगा नाच
विशेष संवाददाता, बस्ती मंडल
- मुंडेरवा वार्ड-2 का ‘घटिया’ नाला: आक्रोशित जनता ने खोली विकास कार्यों की पोल
- सरकारी खजाने में ‘मिट्टी’ की सेंध: मुंडेरवा में ठेकेदार-अफसरों की मिलीभगत बेनकाब
- जनता का गुस्सा: “क्या पहली बारिश में ही ढह जाएगा मुंडेरवा का विकास?”
- मुंडेरवा नगर पंचायत में भ्रष्टाचार का ‘मिट्टी’ टेस्ट: मानकों की उड़ाई धज्जियां
- सरकारी दावों की उड़ी धज्जियां: मुंडेरवा में बिना गिट्टी-मसाले के हो रहा निर्माण कार्य
- विकास के नाम पर ‘बंदरबांट’: मुंडेरवा के अफसरों की रहस्यमयी चुप्पी से सवाल उठे
बस्ती जनपद की मुंडेरवा आदर्श नगर पंचायत इन दिनों विकास कार्यों को लेकर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के एक ऐसे शर्मनाक कारनामे के लिए चर्चा में है, जिसने शासन-प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। नगर पंचायत के वार्ड नंबर 2, गौतम बुद्ध नगर में चल रहा नाला निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की वह ‘प्रयोगशाला’ बन चुका है, जहाँ सरकारी धन को विकास के नाम पर सीधे मिट्टी में दफनाया जा रहा है।
तकनीकी मानकों की अर्थी, भ्रष्टाचार की इमारत
किसी भी नाले या सार्वजनिक निर्माण के लिए ‘बेड कंक्रीट’ (PCC) और मानक के अनुसार गिट्टी-सीमेंट के मिश्रण का उपयोग अनिवार्य होता है। लेकिन मुंडेरवा में जो ‘खेल’ चल रहा है, वह हैरान करने वाला है। ठेकेदार ने नाले की नींव में गिट्टी का नामोनिशान तक नहीं रखा है। सीधे कच्ची मिट्टी की सतह पर ईंटें बिछाई जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्माण कार्य नहीं, बल्कि एक ‘कागजी ढांचा’ खड़ा किया जा रहा है, जो पहली बरसात का भी बोझ नहीं झेल पाएगा।
‘अंधेर नगरी, चौपट राजा’ वाली स्थिति
इस पूरे निर्माण कार्य में कहीं भी कोई इंजिनियर या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच तो दूर, यहाँ काम की देखरेख करने वाला कोई जिम्मेदार व्यक्ति भी नहीं मिलता। लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और नगर पंचायत के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ इतनी मजबूत है कि उन्हें किसी भी जांच या प्रशासनिक कार्यवाही का कोई भय नहीं है। इस रहस्यमयी चुप्पी के पीछे की ‘डील’ क्या है? क्या मुंडेरवा की जनता को जानबूझकर घटिया निर्माण के हवाले किया जा रहा है?
जन आक्रोश: सड़कों पर उतरने की चेतावनी
घटिया सामग्री और भ्रष्टाचार को अपनी आंखों से देख रहे वार्ड नंबर 2 के निवासियों में जबरदस्त आक्रोश है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा घटिया काम कभी नहीं देखा। लोगों का तंज है कि ‘सरकार विकास के लिए पैसा भेजती है और अधिकारी उसे मिट्टी में मिलाकर हजम कर जाते हैं।’ नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर कार्य को रोककर सामग्री की गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई, तो वे नगर पंचायत कार्यालय पर तालाबंदी करने को मजबूर होंगे।
क्या भाजपा की ‘क्लीन इमेज’ पर लग रहा है दाग?
उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार का पूरा जोर ‘भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन’ पर है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश हैं कि निर्माण कार्यों में एक रुपये की भी धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे में मुंडेरवा का यह मामला सत्ताधारी दल की स्थानीय साख को गहरी चोट पहुँचा रहा है। स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता भी इस भ्रष्टाचार से असहज हैं, क्योंकि विकास के नाम पर हो रही यह लूट जनता के बीच उनकी छवि को भी धूमिल कर रही है।
प्रशासन से तीखे सवाल: कब जागेगी नींद?
अब सवाल बस्ती मंडल के प्रशासनिक अधिकारियों और जिला प्रशासन पर खड़ा होता है:
- क्या मुंडेरवा नगर पंचायत में कोई इंजिनियर तैनात नहीं है? यदि है, तो क्या उसे मौके पर जाकर गुणवत्ता जांचने का वेतन नहीं मिलता?
- क्या प्रशासन तब जागेगा जब यह घटिया नाला गिरकर किसी मासूम की जान लेगा?
- आखिर ठेकेदार को किस बड़े रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है कि वह सरेआम सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है?
मुंडेरवा की जनता अब मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक दस्तक देने की तैयारी में है। भ्रष्टाचार का यह ‘मिट्टी वाला खेल’ अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बस्ती की जनता अब सबूतों के साथ उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के निलंबन की मांग पर अड़ी है।
क्या प्रशासन अपनी साख बचा पाएगा या फिर भ्रष्टाचार की इस दलदल में खुद को भी दफन कर लेगा? मुंडेरवा की जनता की नजरें अब कार्रवाई पर टिकी हैं।












